



धर्म वह ज्ञान विज्ञान युक्त विद्या है । जिसके द्वारा शरीर मन प्राण चित्त तथा सकल विश्व की आई हुई विकृतियों को विशुद्ध किया जाता है। धर्म विद्या के अध्ययन के साथ अंतःकरण की शुद्धि तथा सत्य के बोध के साथ अहिंसा आस्तेय अपरिग्रह इंद्रिय निग्रह प्रज्ञा की जागृति, दया क्षमा समता और करुणा जैसे दिव्य गुणों का मानव में बदलाव होता है। धर्म अर्थ निष्काम और मोक्ष का ज्ञान प्राप्त व्यक्ति में ही दिव्यता का दर्शन होता है। सेवा समर्पण श्रद्धा गुरु माता पिता तथा ऋषियों विद्वत जनों के प्रति श्रद्धा ही मानवीयता का बोध कराने और धर्म विज्ञान के प्रति जिज्ञासा उत्पन्न करता है। पदार्थों के प्रति जिज्ञासा होती है। और सर्व कल्याण या विकारों के प्रति जागरूक होने उन्हें दूर करने के लिए मुमुक्षता आवश्यक।
विश्व धर्म संघम की स्थापना 15 अक्टूबर 2019 को अहेतु की प्रेरणा से श्री चंद्र कान्त भारद्वाज ( पूर्व नाम ) , संत स्वामी सौम्या नन्द जी महाराज के द्वारा एवम् उनके शिष्यो की प्रार्थना पर संत श्री मेधा नंद जी महाराज और अन्य के साथ लखनऊ में न्यास के रूप में पंजीकृत कराकर किया गया है। जिसमें विभिन्न बिंदुओं पर विचारों में प्राप्त तथ्यों को समावेश पंजीयन में किया गया है। जो यहां प्रस्तुत हैं।
वर्तमान में सम्पूर्ण मानव जीवन वैश्विक साझेदारी में है । उसका प्रत्येक कार्य सम्पूर्ण विश्व को प्रभावित करता है। इतिहासिक अध्ययन के साथ वर्तमान में स्थितियों में सुधार किया जाना आवश्यक है।
विश्व धर्म संघम का उद्देश्य सम्पूर्ण विश्व के मानव जीवन को उनके उच्चतम मूल्यों के विकास हेतु कार्य बिना किसी भेद भाव किया जाना है। मानव के समस्त व्यवहारिक ज्ञान भौतिक जगत के संपर्क से उत्पन्न जिज्ञासाओं के आधार पर होते है।
भूमि, भवन और भंडारा आदि के लिए दानदाताओं और सहयोगकर्ताओं से निवेदन है कि वे आगे आकर कार्यालय से संपर्क करें। यह दान किसी नेक काम में सहयोग करने के लिए हो सकता है, इसलिए इच्छुक लोग सीधे कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं।
विभिन्न कार्य और उद्देश्यों की पूर्ति के लिए दनादि और सहयोग तथा सदस्यता से प्राप्त समन्वय और रख रखाव के लिए बैंक अकाउंट द्वारा किए जाने का प्रबंधन संघठन द्वारा किया गया है जिससे आय व्यय की समुचित व्यवस्था हो सके इसके लिए Indian Overseas Bank के साथ अकाउंट पंजीकृत खोला गया है।




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