हमारे बारे में

श्री चंद्र कान्त भारद्वाज ( पूर्व नाम ) संत स्वामी सौम्या नन्द जी महाराजसंस्थापक

विश्व धर्म संघम की स्थापना

विश्व धर्म संघम की स्थापना 15 अक्टूबर 2019 को  अहेतु की प्रेरणा से श्री चंद्र कान्त भारद्वाज ( पूर्व नाम ), संत स्वामी सौम्या नन्द जी महाराज के द्वारा एवम् उनके शिष्यो की प्रार्थना पर संत श्री मेधा नंद जी महाराज और अन्य के साथ लखनऊ में न्यास के रूप में पंजीकृत कराकर किया गया है। जिसमें विभिन्न बिंदुओं पर विचारों में प्राप्त तथ्यों को समावेश पंजीयन में किया गया है। जो यहां प्रस्तुत हैं। विश्व धर्म संघम न्यास का पंजीयन संख्या 223/2019/lko है ।

विश्व धर्म संघम के कार्य उद्देश्य​

सम्पूर्ण विश्व में सभी धर्मों में व्याप्त अध्यात्म ज्ञान का प्रचार प्रसार उनकी मूल भाषाओं के अध्ययन अध्यापन के साथ सर्वजन कल्याण एवम् एकीकरण तथा सामाजिक समन्वय हेतु इस न्यास का गठन किया गया है। धर्म के मूल स्वरूप को जानना और उसकी प्रकृति को मानव के ज्ञान के लिए प्रचारित एवम् प्रसारित करना तथा उसका संवर्धन एवम् संरक्षण करना।

  • धार्मिक मूल ज्ञान को सभी धर्म और भाषाओं के लोगों में पुनर्जागरण और स्थापना करना।
  • मानव में वैचारिक, धार्मिक, प्राकृतिक व वैश्विक ज्ञान हेतु शोध संस्थान व विद्यालयों की स्थापना करना।
  • सामाजिक सामंजस्य,  एकता हेतु मानवीय गुणों का शोध व स्थापना करना।
  •  ज्ञान – विज्ञान, ज्योतिष एवम् पराभौतिक विद्याओं का अध्ययन एवम् शोधन कर मानवीय हितों के लिए अनुप्रयोग करना ।
  • ईश्वर की अनुभूति करने की विधाओं का अनुप्रयोग ज्ञान,  विज्ञान सहित करना व कराना।
  •  जैविक , प्राकृतिक एवम मानवीय संरक्षण हेतु सभी प्रकार के प्रयास और कार्य करना।
  •  धार्मिक एवम् सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना तथा समय – समय पर जन मानस में प्रसाद वितरण व भंडारों  आदि का आयोजन करना।
  • समाज के निम्न आय वर्ग के लोगों की सहायता तथा वृद्ध जनों की सेवा करना ।
  • गौशाला, आश्रम, शिक्षण संस्थानों की स्थापना करना।
  • धार्मिक ग्रंथों की छपाई व उनका विक्रय करना।
  • सम्पूर्ण विश्व में धर्म की स्थापना करना।

अपितु हम  ईश्वर से विनती करते हुए आशा और विश्वास एवम् दूध इच्छा शक्ति के साथ अपने उद्देश्यों की पूर्ति के लिए कटिबद्ध हैं । फिर भी सम्पूर्ण विश्व की मानव विविधता पर  उनके साथ कार्य करने के लिए हर संभव प्रयास करते हुए आगे बढ़ते रहेंगे। फिर भी किसी विशिष्ट और विविधता पूर्ण दुष्कर कार्य जो समस्त मानव के संदर्भ में हो उन सबका सहयोग आवश्यक है। विद्वत धार्मिक जन और समाज के प्रबुद्ध जन तथा बिना राजनैतिक सहयोग के कोई कार्य संभव नहीं है। इसके लिए हम विश्व के समस्त मानव मात्र से विनंती करते हैं कि वे आगे आए । और सभी राष्ट्र राज्य का हमें सहयोग चाहिए। क्योंकि कोई भी मानवीय व्यवस्था के लिए सरकार अपने नागरिकों के लिए उत्तरदाई होती है। धर्म विद्या है । जो मानव के मन बुद्धि चित्त के साथ उसके बौद्धिक और कार्य क्षमता को उत्तम बनाता है।

कथित धर्मों ने जीवन शैली दी है। लेकिन मानवीय व्यवहार की मूल वृत्तियां प्राकृतिक धर्म के रूप में प्रकट होती हैं। कोई भी कृत्रिम व्यवस्था में परिवर्तन होना प्राकृतिक नियम है । जबकि मानव  निर्मित कोई भी जीवन शैली तत्कालीन समय की वातावरण स्थिति परिस्थिति पर आवश्यकताओं के आधार पर बनती हैं। समूह के विचारों की भिन्नता से उनमें विभाजन होता है। आज एक ही कथित धर्मों में कितनी शाखाएं बन चुकी हैं। इसका सीधा तात्पर्य है कि, कोई भी कृत्रिम व्यवस्था शाश्वत नहीं है।

विश्व धर्म संघम की ओर से आप सभी का  हार्दिक स्वागत है। आप संघठन को सेवा सहयोग जिस रूप में दे सकते हैं। अवश्य दें। विश्व धर्म आध्यात्मिक शोध एवम अनुवीक्षण संस्थान विश्व विद्यालय की स्थापना करना हमारी प्रथम प्रयास है। 

विश्व धर्म संघम की स्थापना 15 अक्टूबर 2019 को  अहेतु की प्रेरणा से श्री चंद्र कान्त भारद्वाज ( पूर्व नाम ), संत स्वामी सौम्या नन्द जी महाराज के द्वारा एवम् उनके शिष्यो की प्रार्थना पर संत श्री मेधा नंद जी महाराज और अन्य के साथ लखनऊ में न्यास के रूप में पंजीकृत कराकर किया गया है। जिसमें विभिन्न बिंदुओं पर विचारों में प्राप्त तथ्यों को समावेश पंजीयन में किया गया है। जो यहां प्रस्तुत हैं। विश्व धर्म संघम न्यास का पंजीयन संख्या 223/2019/lko है ।

This website may collect data about you, use cookies, embed additional third-party tracking, and monitor your interaction with that embedded content

Follow Us On Socials

© Copyright 2025 : Vishva Dharm Sangham. All Rights Reserved. | Website Developed by: Digital Stands.

Scroll

Our site uses cookies. By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.